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Ajor

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Author: Ashok Shah
Pub-Year: 2021
Edition: 1st
Pages: 112
Publisher: Radhakrishna Prakashan
Subject: Fiction : Stories
Category: Fiction : Stories

99 in stock

Description

ग्रामीण जीवन की विडम्बनाएँ, समस्याएँ और उनसे संघर्ष; विकास के शहर-केन्द्रित मॉडल के अमानवीय अतिक्रमण के सामने सहमी खड़ी आदिवासी जीवन की आत्मनिर्भरता; शासन-प्रशासन की आधे-अधूरे मन से शुरू की गई जनकल्याण योजनाओं की हक़ीक़त और इस सबके बीच आम आदमी की जिजीविषा—अशोक शाह की कहानियों में इन चीज़ों को विस्तृत तथा प्रामाणिक विवरणों के साथ अंकित किया गया है।
कई बार फ़िल्म-जैसी छवियों के माध्यम से वे समाज के हाशियों पर सिमटते समाज की पीड़ा को इतने तारतम्य के साथ प्रस्तुत करते हैं कि पूरा चित्र आँखों के आगे साकार हो जाता है। इस संग्रह में संकलित हर कहानी पाठक के सामने एक ऐसी दुनिया खोलती है जिसके बारे में हमने सुना भले हो, लेकिन इस तरह देखा कभी नहीं।
पेशे से प्रशासनकि सेवाओं में रहे अशोक शाह मूलतः कवि हैं लेकिन कहानी उनके लिए उस समय बहुत ज़रूरी हो जाती है जब यथार्थ की जटिलता को समझने और समझाने में उन्हें अपेक्षाकृत ज़्यादा विस्तार आवश्यक लगने लगता है। उनका कवि होना इन कहानियों की संवेदना तथा वस्तु-चित्रण में भी बख़ूबी नज़र आता है।
शिल्प को लेकर अतिरिक्त आग्रह की शिकार हिन्दी कहानी के परिदृश्य में इन कहानियों को इनकी वस्तु-विविधता के लिए ज़रूर पढ़ा जाना चाहिए। संग्रह की शीर्षक कहानी यद्यपि एक आशा तथा प्रसन्नतादायी बिन्दु पर समाप्त होती है, लेकिन उससे पहले की तटस्थ विवरणात्मकता आपको लगातार एक व्यथा से बींधे रहती है। बाक़ी कहानियाँ भी किसी न किसी कोण से हमें ऐसे ही व्यथित करती हैं।

लेखक :

अशोक शाह

बिहार के सीवान में जन्म। शिक्षा आई.आई.टी. कानपुर एवं आई.आई.टी. दिल्ली से प्राप्त करने के उपरान्त एक वर्ष तक भारतीय रेलवे इंजिनियरिंग सेवा में कार्य किया। 1990 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदार्पण कर मध्य प्रदेश के 10 से अधिक जिलों में विभिन्न पदों पर कार्य किया।
प्रका‍श‍ित कृतियाँ : माँ के छोटे घर के लिए, उनके सपने सच हों, समय मेरा घर है, समय की पीठ पर हस्ताक्षर है दुनिया, समय के पार चलो, पिता का आकाश, जंगल राग, अनुभव का मुँह पीछे है, ब्रह्मांड एक आवाज़ है, उफ़क़ के पार, कहानी एक कही हुई, उसी मोड़ पर तथा जब बोलना ज़रूरी हो (कविता संग्रह); The Grandeur of Granite : Shiva-Yogini Temples of Vyas Bhadora, Ashapuri : The Cradle of Paramara and Pratihara Art : Temples Unveiled (पुरातत्त्व); Total Eternal Reflection (दर्शन एवं अध्यात्म)।
सम्पादन : ‘बैगानी शब्दकोश’, ‘भिलाली शब्दकोश’, ‘बारेली शब्दकोश’, ‘पारम्परिक बैगानी गीत’, ‘हिरौदी मुंदरी बैगानी मौखिक कथाएँ’, ‘ढंगना बैगा चित्रांकन परम्परा’, ‘जनजातीय चित्रशिल्प’, ‘प्रकृति पूजा का पर्व इंदल’, ‘मध्य प्रदेश की जनजातियाँ’, ‘अगरिया’।
अनियतकालीन लघु पत्रिका ‘यावत्’ का सम्पादन।

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