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Bhimrao Ambedkar : Ek Jeevani/Dr. Bhimrao Ambedkar : Vyaktitva ke Kuchh Pahlu/Nirman Purush Dr. Ambedkar Ki Samvidhan Yatra/B. R. Ambedkar : Bhartiya Waltair Evam Marx

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SKU: डॉ. आंबेडकर : व्यक्तित्व और जीवन से जुड़ी कुछ किताबें Subject: Biography
Categories: biography, Dalit Literature

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भीमराव आंबेडकर : एक जीवनी /  लेखक : क्रिस्तोफ जाफ्रलो , अनुवाद : योगेन्द्र दत्त

भीमराव आंबेडकर हिन्दुओं में पहले दलित या निम्न जाति नेता थे जिन्होंने पश्चिम जाकर पीएच-डी. जैसे सर्वोच्च स्तर तक की औपचारिक शिक्षा हासिल की थी । अपनी इस अभूतपूर्व उपलब्धि के बाबजूद वह अपनी जड़ो से जुड़े रहे और तमाम उम्र दलित अधिकारों के लिए लड़ते रहे । भारत के सबसे प्रखर और अग्रणी दलित नेता के रूप में आंबेडकर का स्थान निर्विवाद है ।
निम्न जातियों को एक अलग औपचारिक और कानूनी पहचान दिलाने के लिए आंबेडकर सालों तक भारत के सवर्ण हिन्दू वर्चस्व वाले समूचे राजनीतिक प्रतिष्ठान से अकेले लोहा लेते रहे ।
स्वतंत्र भारत की पहली केन्द्र सरकार में आंबेडकर को कानून मंत्री और संविधान का प्रारूप तैयार करनेवाली समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया । इन पदों पर रहते हुए उन्हें भारतीय राजनय पर गांधीवादी प्रभावों पर अंकुश लगाने में उल्लेखनीय सफलता मिली ।
क्रिस्तोफ़ जाफ्रलो ने उनके जीवन को समझने के लिए तीन सबसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला है : एक समाज वैज्ञानिक के रूप में आंबेडकर; एक राजनेता और राजनीतिज्ञ के रूप में आंबेडकर; तथा सवर्ण हिन्दुत्व के विरोधी एवं बौद्धधर्म के एक अनुयायी व प्रचारक के रूप मे आंबेडकर ।

 

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : व्यक्तित्व के कुछ पहलू / लेखक : मोहन सिंह

डॉ. भीमराव अम्बेडकर का नाम भारत के परिवर्तनवादी आन्दोलनों के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा । वे भारत के दलित समाज के उद्धारक तथा पुरुषार्थ के प्रतीक थे ।
भारतीय समाज, जो अनंत काल से जाति, वर्ण-विभाजन के कारण हजारों भागों में विभक्त था, उसके स्वीकरण का जो सराहनीय प्रयास डॉ. अम्बेडकर ने किया, वह भारतीय इतिहास का सुनहरा अध्याय है ।
जाति-प्रथा पर आधारित भारतीय समाज में जन्म-आधारित विषमता थी ।रोजी-रोजगार में भयंकर अन्तराल था । प्रगति के अवसर जन्मना जाति के आधार पर कुछ हिस्सों के लिए विशेष अवसर प्रदान करते थे और बहुसंख्यक वर्ग के लिए आगे बढ़ने के दरवाजे बंद थे-द्विजवादी उच्चता के शिकार, अनंतकाल से जन्म के अभिशाप से अभिशप्त बहुसंख्यक वर्ग को डॉ. अम्बेडकर ने अपने साहसिक नेत्रित्व से आगे बढ़ने की अदम्य शक्ति दी ।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर के व्यक्तित्व से साक्षात्कार करनेवाली पठनीय पुस्तक ।

 

निर्माण-पुरुष डॉ. आंबेडकर की संविधान यात्रा / लेखक : अनूप बरनवाल

आजादी के समय देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती भावी शासन-व्यवस्था में सामन्तवाद को प्रभावी होने से बचाना था। समाज में व्याप्त सामन्तवाद के खिलाफ लड़ते रहने वाले बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर द्वारा संविधान-निर्माण के दौरान इस चुनौती से किस तरह निपटा गया? इसका जवाब खोजने के साथ संविधान में ‘देश के नाम’, ‘राज्यक्षेत्र’, ‘मूल अधिकार’, ‘नीति-निर्देशक सिद्धान्त’ से सम्बन्धित अनुच्छेद १ से ५१ के प्रावधानों को अन्तिम रूप देने के लिए संविधान सभा मे हुए बहस को सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है।
बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की जीवनी में रूचि रखने वाले देशवासियों के समक्ष आजादी के आन्दोलन में डॉ. अंबेडकर की भूमिका को सन्देह के घेरे में करके तरह-तरह के सवाल किये जाते हैं, इस पुस्तक में इसका भी जवाब खोजने का प्रयास किया गया है।
देश की गुलामी के लिए उत्तरदायी रही भारतीय समाज की सामन्तवादी प्रवृत्ति को समाप्त करने एवं देश को आन्तरिक गुलामी से मुक्त कराने में बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर द्वारा किये गये संघर्ष और उनके विचार का विश्लेषणात्मक अध्ययन इस पुस्तक के माध्यम से किया गया है।
बिलकुल विपरीत परिस्थिति में भारत जैसे सांस्कृतिक विविधता वाले देश के लिए सर्वमान्य संविधान के निर्माण में डॉ. अम्बेडकर एवं अन्य संविधान निर्माताओं की भूमिका का भी विश्लेषणात्मक अध्ययन इस पुस्तक के माध्यम से किया गया है।

 

बी. आर. अम्बेडकर / लेखक : पी. एन. सिंह

डॉ. अम्बेडकर में वाल्तेयर जैसी मेघा, आलोचनात्मक विवेक और साहस था और उन्होंने भी हिन्दू समाज की मानसिक जड़ता को तोड़ने के लिए अदभुद सहस का परिचय दिया ।
अम्बेडकर ने जड़ता के विरुद्ध संघर्ष किया और उनके नाम से जुड़े राजनीतिक आन्दोलन, सत्ता-केन्द्रित होते हुए भी, प्रायः सभी सामाजिक संघर्षो से कमोबेश जुड़े हुए हैं ।
मार्क्स, गाँधी और बाबा साहब तीनों ही अपने-अपने ढंग से मनुष्य की आभावग्रस्त स्थितियों से मुक्ति चाहते हैं ! यह मुक्ति काल्पनिक नहीं, वास्तविक है । मार्क्स आर्थिक मुक्ति पर बल देते है, अम्बेडकर साहब सामाजिक मुक्ति पर और गाँधी सत्य और अहिंसा के माध्यम से अपनायी गयी वैयक्तिक मुक्ति पर । तीनों के अलग-अलग विशेष क्षेत्र हैं । लेकिन मानव-जीवन तो एक ही है । ये तीनो और अम्बेडकर के सार्थक निष्कर्षों को सावधानीपूर्वक लागू करने में ही मानव समाज का हित है।

 

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