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Kissago/Khali Naam Gulab Ka/Shastra Vidaai

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SKU: Set-36 (नोबल पुरस्कार से सम्मानित उपन्यास) Author: Ernest Hamingway, Mario Vargas Llosa,, Umberto Eco
Subject: Fiction : Novel
Category: Fiction : Novel

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Description

किस्सागो

‘किस्सागो’ मारियो वार्गास ल्योसा के सबसे महत्त्वाकांक्षी उपन्यासों में से एक है। यह लातिन अमरीकी देश पेरु के एक प्रमुख आदिवासी समूह के इर्द-गिर्द घूमता है। आदिवासी जीवनदृष्टि और हमारी आज की आधुनिक सभ्यता के बरक्स उसकी इयत्ता को एक बड़े प्रश्न के रूप में खड़ा करनेवाला यह सम्भवतः अपनी तरह का अकेला उपन्यास है। मिटने-मिटने की कगार पर खड़े इन समाजों के पृथ्वी पर रहने के अधिकार को इसमें बड़ी मार्मिक और उत्कट संवेदना के साथ प्रस्तुत किया गया है।
एक साथ कई स्तरों पर चलनेवाले इस उपन्यास में एक तरफ आधुनिक विकास की उत्तेजना में से फूटे तर्क-वितर्क हैं तो दूसरी तरफ नदी, पर्वत, सूरज, चाँद, दुष्ट आत्माओं और सहज ज्ञानियों की एक के बाद एक निकलती कथाओं का अनवरत सिलसिला है।
विषम परिस्थितियों से जूझते, बार-बार स्थानान्तरित होने को विवश, टुकड़ों-टुकड़ों में बँटे माचीग्वेंगा समाज को जोड़नेवाली, उनकी जातीय स्मृति को बार-बार जाग्रत् करनेवाली एकमात्र जीती-जागती कड़ी है ‘किस्सागो’ यानी ‘आब्लादोर’। यह चरित्र उपन्यास के समूचे फलक के आरपार छाया हुआ है। इस उपन्यास का रचयिता स्वयं एक किरदार के रूप में उपन्यास के भीतर मौजूद है। वह और यूनिवर्सिटी के दिनों का उसका एक अभिन्न मित्र साउल सूयतास आब्लादोर की केन्द्रीय अवधारणा के प्रति तीव्र आकर्षण महसूस करते हैं, पर उसे ठीक-ठीक समझ नहीं पाते। वे एक दूसरे से अपने इस सबसे गहरे ‘पैशन’ को छुपाते हैं जो अन्ततोगत्वा उनके जीवन की अलग-अलग किन्तु आपस में नाभि-नाल सम्बन्ध रखनेवाली राहें निर्धारित करता है। एक उसमें अपने उपन्यास का किरदार तलाशता भटकता है तो दूसरा स्वयं वह किरदार बन जाता है। यह उपन्यास इस अर्थ में एक आत्मीय सहचर के लिए मनुष्य की अनवरत तलाश या भटकन की कथा भी है।
उपन्यास यथार्थ और मिथकीय, समसामयिक और प्रागैतिहासिक के ध्रुवीय समीकरणों को एक साथ साधने का सार्थक उपक्रम है। आज भारत में आदिवासी समाजों की स्थिति को लेकर चलती बहस के मद्देनजर सम्भवतः यह उपन्यास हमारे लिए विशेष प्रासंगिक और महत्त्वपूर्ण हो उठता है।

लेखक : मारियो वार्गस लिओस, अनु. शंपा शाह

 

खाली नाम गुलाब का

प्रख्यात इतालवी कथाकार, सौन्दर्यशास्त्री और साहित्य-चिन्तक अम्बर्तो इको की यह क्लासिक औपन्यासिक कृति चौदहवीं सदी के एक इसाई मद में घटित रोमांचकारी घटनाओं का वृत्तान्त है ।
मठ में एक के बाद एक होती आधा दर्जन से ज्यादा सन्यासियों की रहस्यमय हत्याएं और उपन्यास के मुख्य चरित्र, फ्रांसिस्कन सन्यासी और पंडित ब्रदर विलिमय द्वारा इस रहस्य को भेदने की कोशिशें, एक दूसरे गहरे स्तर पर, ज्ञान की किलेबंदी तथा उसको तोड़ने के विलक्षण रूपक में फलित होती हैं जिसमें पुस्तकें और बौद्धिक प्रत्यय, पठन, ज्ञान और जिज्ञासा के संवेग, धार्मिक आस्था और श्रद्धा के उत्कट, हिंसक आवेग जैसी अनेक चीजें अपनी साधारण एन्द्रियता के साथ हमारे अनुभव का हिस्सा बनती हैं । एक ओर चौदहवीं सदी के इसाई जगत के धर्मपरिक्षणों और धर्मयुद्धों की पृष्ठभूमि में घटित होती रहस्य और रोमांच से भरी रक्तरंजित घटनाएँ, और दूसरी ओर, मानो, योरोपीय रेनेसां और एनलाइटमेंट की अगुवाई करते, बेहद सघन किन्तु उतने ही प्रांजल और अंतर्दृष्टिपूर्ण बौद्धिक विमर्श, एक दूसरे से अंतर्गुम्फित होकर, एक दूसरे में रूपांतरित होकर जिस महान त्रासद रूपक की रचना करते हैं, वह इस उपन्यास का चमत्कृत कर देने वाला अनुभव है ।

लेखक : अम्बरतो इको, अंग्रेजी से अनुवाद मदन सोनी

शस्त्र-विदाई

‘शस्त्र विदाई’ अर्नेस्ट हेमिंग्वे के विश्वप्रसिद्ध उपन्यास ‘ए फेयरवेल टू आर्म्स’ का अनुवाद है । कई फिल्मों का आधार बन चुके और विश्व की अनेक भाषाओँ में अनुदित इस उपन्यास की पृष्ठभूमि में प्रथम विश्वयुद्ध है ।
1929 में प्रकाशित ‘ए फेयरवेल टू आर्म्स’ का कथावाचक पत्र अमेरिकी फेडरिक हेनरी है जो इतालवी सेना में लेफ्टिनेंट है ।
प्रथम विश्वयुद्ध के लोमहर्षक विवरणों, संकी सिपाहियों, युद्ध और विस्थापन से जूझते नागरिकों से अंटे उपन्यास के विशाल फलक का केंद्र हेनरी और कैथरीन बार्कले का प्रेम है ।
इस उपन्यास के प्रकाशन के साथ ही हेमिंग्वे एक आधुनिक अमेरिकी लेखक के रूप में स्थापित हो गए थे,
यही उपन्यास उसका पहला बेस्टसेलर था ।

लेखक : अर्नेस्ट हेमिंग्वे, अंग्रेजी से अनुवाद अजय चौधरी

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