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Kavita : Kya Kahan Kyon

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SKU: NewRelease-017 Author: Ashok Vajpeyi
Pub-Year: 2021
Edition: 1st
Pages: 358p
Publisher: Rajkamal Prakashan
Subject: Literary Criticism
Category: Literary Criticism

100 in stock

Description

यह पुस्तक विधिवत् लिखी गयी पुस्तक नहीं है : पिछले छह दशकों से कविता के बारे में समय-समय पर जो सोचा-गुना-लिखा, उसका  संचयन है।

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स्वयं कवि होने के नाते मैंने कविता की, अल्पसंख्यकता के बावजूद, अपनी जगह खोजने-पाने की जद्दोजहद और उस पर बेजा क़ब्ज़ा न करने देने की सावधानी भरसक अलक्षित नहीं जाने दी है। कविता किसी बिल में नहीं दुबकी है और, सौभाग्य से, वह साहस-संघर्ष-सौन्दर्य-अन्त:करण का अवाँगार्द बनी हुई है। वह साहचर्य का स्थल है : कल्पना और स्वप्न की रंगभूमि भी। यह आरोप लग सकता है कि मैंने कविता से बहुत अधिक की उम्मीद लगा रखी है : मैं उसे स्वीकार करता हूँ क्योंकि मुझे कभी कविता के सिलसिले में कम-से-कम का ख़याल नहीं आया। एक कारण यह भी कि संसार की कविता कम-से-कम की नहीं अधिक-से-अधिक की भावना जगाती रही है। अगर पाठकों में कविता को लेकर कुछ उद्वेलन और उत्सुकता यह संचयन जगा पाये तो उसकी मेरी लम्बी और निस्संकोच पक्षधरता अकारथ नहीं जायेगी।

लेखक : अशोक वाजपेयी

अशोक वाजपेयी साठ वर्षों से अधिक समय से कविता, आलोचना, कलानुराग, सम्पादन, आयोजन और संस्था-निर्माण के क्षेत्रों में सक्रिय और नवाचारी रहे हैं। उन्होंने अपने समय की कविता पर लिखने के अलावा अनेक बड़े कवियों—अज्ञेय, शमशेर बहादुर सिंह, गजानन माधव मुक्तिबोध, रघुवीर सहाय, श्रीकान्त वर्मा, कमलेश, धूमिल, विनोद कुमार शुक्ल आदि और बड़े कथाकारों—कृष्णा सोबती, कृष्ण बलदेव वैद, निर्मल वर्मा आद‍ि पर लिखा है। कबीर और ग़ालिब पर एक पुस्तक पर इन दिनों काम कर रहे हैं।

16 जनवरी 2021 को अशोक वाजपेयी अपने जीवन के आठ दशक पूरे कर लेंगे। वे इन दिनों रज़ा फ़ाउण्डेशन के प्रबन्ध न्यासी हैं और लगभग दो सौ पुस्तकें प्रकाशित करनेवाली रज़ा पुस्तक माला का प्रधान सम्पादन कर रहे हैं। सपरिवार वे नयी दिल्ली में यमुना पार रहते हैं।

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