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Meera Aur Mahatma/Edwina Aur Nehru

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SKU: Set-13 (गांधी और नेहरु : जीवन-मुल्यांकन) Author: Catherine Clement, Sudhir Kakkar
Publisher: Rajkamal Prakashan
Subject: Fiction : Novel
Category: Fiction : Novel

192 in stock

Description

मीरा  और महात्मा

मीरा और महात्मा सन् 1925; भारत का स्वतंत्रता संग्राम बिखरी हुई हालत में था, नेताओं के बीच मतभेद पैदा हो रहे थे, और पूरे देश में साम्प्रदायिक वैमनस्य की घटनाएँ हो रही थीं। इस दौरान, सक्रिय राजनीति से अलग-थलग बापू गांधी साबरमती आश्रम में अपने जीवन की सबसे महत्त्वपूर्ण गतिविधि में संलग्न थे। वे आत्मानुशासन, सहनशीलता और सादगी के उच्चतर मूल्यों को समर्पित एक समुदाय की रचना में व्यस्त थे। बापू की इसी दुनिया में पदार्पण हुआ एक ब्रितानी एडमिरल की बेटी मेडलिन स्लेड का जो बाद में मीरा के नाम से जानी गईं। गांधी के लिए जहाँ वास्तविक आध्यात्मिकता का अर्थ था आत्मानुशासन और समाज के प्रति पूर्ण समर्पण, वहीं मीरा मानती थीं कि सत्य और सम्पूर्णता का रास्ता मानव रूप में साकार शाश्वत आत्मा के प्रति समर्पण में है, और यह आत्मा उन्हें गांधी में दिखाई दी। इस प्रकार दो भिन्न आवेगों से परिचालित इन दो व्यक्तियों के मध्य एक असाधारण साहचर्य का सूत्रपात हुआ। विख्यात मनोविश्लेषक-लेखक सुधीर कक्कड़ ने बापू और मीरा के 1925 से लेकर 1930 तथा फिर 1940- 42 तक के समय को इस उपन्यास का आधार बनाया है, जिस दौरान, लेखक के अनुसार वे दोनों ज्यादा करीब थे। ऐतिहासिक तथ्यों की ईंटों और कल्पना के गारे से चिनी गई इस कथा की इमारत में लेखक ने बापू और मीरा के आत्मकथात्मक लेखों, पत्रों, डायरियों और अन्य समकालीनों के संस्मरणों का सहारा लिया है। राष्ट्रपिता को ज्यादा पारदर्शी और सहज रूप में प्रस्तुत करती एक अनूठी कथाकृति।

लेखक : सुधीर कक्कड़

ग्रेजी के महत्त्वपूर्ण भारतीय लेखक और मनोविश्लेषक।

भारत, यूरोप और अमेरिका के अनेक विश्वविद्यालयों में अध्यापन।

महत्त्वपूर्ण प्रकाशित रचनाएँ—द इनर वर्ल्ड (1978); शमन्स, मिस्टीक्स एंड डॉक्टर्स (1982); वेल्स ऑफ लव, सेक्स एंड डेंजर (1986); इंटीमेट रिलेशंस  (1990); द एनालिस्ट एवं द मिस्टीक (1992); द कलर्स ऑफ वायलेंस (1996); कल्चर एंड साइके (1997); चुनी हुई रचनाओं का संकलन

द इंडियन साइके (1996) तथा मीरा एंड महात्मा (2004)।

द एसेटिक ऑफ डिजायर उनका प्रथम उपन्यास है जिसका हिन्दी में ‘कर्मयोगी’ शीर्षक से अनुवाद प्रकाशित हो चुका है। हिन्दी में अनूदित उनकी दूसरी औपन्यासिक कृति आनन्द वर्षा (द एक्सटेसी) है।

 

एडविना और नेहरु

नेहरू और एडविना के चरित्रों को केंद्र में रखकर लिखा गया यह ऐतिहासिक उपन्यास तथ्य और कल्पना के अद्भुत मेल से रचा गया है । जो घटित हुआ वह तो सत्य है ही, लेकिन जो घटित नहीं हुआ, वह भी इसलिए एक हद तक सच्चा है क्योंकि उसका घटित होना काफी हद तक संभव था । फ्रांसीसी पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गई यह प्रेम कहानी भारतीय जनमानस को भी उसी रूप में उद्वेलित करेगी इसमें संदेह नहीं । भारत के इतिहास में बीसवीं शताब्दी की सबसे महत्त्वपूर्ण घटना 1947 का राजनीतिक विभाजन है । यह उपन्यास, इस घटना के अभिकर्ता तमाम महत्त्वपूर्ण पात्रों के भीतर झाँककर इसके कारणों और प्रभावों की दास्तान कहने का प्रयास करता है, और इस तरह दृश्य के अदृश्य सूत्रों का उद्‌घाटन करता है । सार्वजनिक के भीतर जो कुछ निजी है, वही उसका अन्त-सूत्र भी है, और अपनी मर्मस्पर्शिता में कहीं अधिक प्रभावी भी । इन्हीं अन्त-सूत्रों को उनकी मार्मिक संवेदनीयता के साथ ग्रहण कर इस उपन्यास का कथात्मक ताना-बाना बुना गया है । घटनाएँ प्राय: जानी-सुनी हैं – एक अर्थ में पूर्व परिचित । यही स्थिति पात्रों की है – जाने-माने, साहसी, प्रतापी, योद्धाओं का एक पूरा संसार । पर इन सबने मिलकर जो इतिहास रचा उसमें कौन, कहाँ, कितना टूटा-मुद्रा, बना-बिगड़ा, वह घटनाओं का नहीं संवेदनाओं का इतिहास है । एक बिंदु ऐसा होता है जो बाहर और भीतर के तूभाव का संधिस्थल रचता है, जहाँ अक्सर जो बहुत अंतरंग है, निजी है उसके अतिक्रमण की अनंत साधना से बहिरंग की रचना होती है । इसी बिंदु को पकड़ने की कोशिश है इस उपन्यास में । समय के दो महत्वपूर्ण पात्रों की केन्द्रीयता से उठकर समय को फिर से रचने की – उसकी घटनात्मकता में नहीं, मार्मिकता में ।

लेखक :कैथरीन क्लैमाँ

जन्म – 1939, पेरिस में ।

शिक्षा – 1962 में दर्शन में फ्रांसीसी शिक्षा-पद्धति की उच्चतम उपाधि । सोबोर्न विश्वविद्यालय में ब्लादीमीर जेन्कलविच की सहायक । 1978, पेरिस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर । 1982-87, विदेश मंत्रालय में फ्रांस और अन्य देशों में कलात्मक संबंधों के एसोसियेशन की निदेशक । 1987-91, भारत में फेस्‍टिवल ऑफ फ्रांस के डाइरेक्टर जनरल की प्रतिनिधि । साढे चार वर्ष वियना में रहने के बाद इस समय अफ्रीका में निवास ।
प्रकाशन : अंग्रेजी में अनूदित गैर-कथात्मक रचनाएं : द वियरी संस ऑफ-फ्रायड; लाइफ एड लीजेंड्स ऑफ जाक् लाकां?
ऑपेरा और द अनडूइंग ऑफ विमेन (एलेन सिक्सु के साथ); द न्यू बोर्न वूमेन; सिंकोप, द फिलॉसफी ऑफ रैपचर ।
इसके अतिरिक्त फ्रांसीसी भाषा में नौ रचनाएं जिनका अनुवाद अंग्रेजी में नहीं हुआ । फ्रांसीसी में आठ उपन्यास ।
काव्य-संग्रह : ग्रोइंग एन इडियन स्टार (विकास) । विभिन्न रचनाओं का विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद ।

 

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