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Phir Meri Yaad/Aameen/Mere Baad….

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SKU: Set-22 (कविता/शायरी) Author: Aalok Shrivastava, Kumar Vishwas, Rahat Indori, Swanand Kirkire
Subject: Poetry, Shayari
Categories: Poetry, Shayari

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Description

फिर मेरी याद

कोई दीवाना कहता है’ काव्य संग्रह के प्रकाशन के 12 वर्षों बाद प्रकाशित हो रहा ‘फिर मेरी याद’ कुमार विश्वास का तीसरा काव्य-संग्रह है. इस संग्रह में गीत, कविता, मुक्तक, क़ता, आज़ाद अशआर— सबकी बहार है. “कुमार विश्वास के गीत ‘सत्यम शिवम सुन्दरम’ के सांस्कृतिक दर्शन की काव्यगत अनिवार्यता का प्रतिपादन करते हैं. कुमार के गीतों में भावनाओं का जैसा सहज, कुंठाहीन प्रवाह है, कल्पनाओं का जैसा अभीष्ट वैचारिक विस्तार है तथा इस सामंजस्य के सृजन हेतु जैसा अद्भुत शिल्प व शब्दकोष है, वह उनके कवि के भविष्य के विषय में एक सुखद आश्वस्ति प्रदान करता है.” –डॉ. धर्मवीर भारती “डॉ. कुमार विश्वास उम्र के लिहाज़ से नये लेकिन काव्य-दृष्टि से खूबसूरत कवि हैं. उनके होने से मंच की रौनक बढ़ जाती है. वह सुन्दर आवाज़, निराले अंदाज़ और ऊंची परवाज़ के गीतकार, गज़लकार और मंच पर क़हक़हे उगाते शब्दकार हैं. कविता के साथ उनके कविता सुनाने का ढंग भी श्रोताओं को नयी दुनिया में ले जाता है. गोपालदास नीरज के बाद अगर कोई कवि, मंच की कसौटी पर खरा लगता है, तो वो नाम कुमार विश्वास के अलावा कोई दूसरा नहीं हो सकता है.” –निदा फ़ाज़ली “डॉ. कुमार विश्वास हमारे समय के ऐसे सामर्थ्यवान गीतकार हैं, जिन्हें भविष्य बड़े गर्व और गौरव से गुनगुनाएगा.” –गोपालदास‘नीरज’

लेखक : कुमार विश्वास

कुमार विश्वास

कुमार विश्वास का जन्म 10 फरवरी, 1970 को उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद के पिलखुआ में एक मध्यवर्गी परिवार में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा वही हुई। इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोडकर उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, पीएचडी की। उसके बाद उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत 1994 में राजस्थान में प्रवक्ता के रूप में 1994 में शुरू की.

कुमार विश्वास को श्रृंगार रस का कवि माना जाता है। फ़िलहाल वे मंच के सबसे व्यस्त कवियों में से हैं. विभिन्न पत्रिकाओं में नियमित रूप से छपने के अलावा डॉ॰ कुमार विश्वास की दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- ‘इक पगली लड़की के बिन’ (1996) और ‘कोई दीवाना कहता है’ (2007)।

 

आमीन

आलोक श्रीवास्तव के पहले और बहुचर्चित गज़ल-संग्रह ‘आमीन’ का यह पाँचवाँ संस्करण है। पन्नों के कैनवस पर शब्दों के रंग बिखेरने में माहिर आलोक नए दौर और आम फहम ज़बान के शायर हैं। उन्होंने काव्य की हर विधा में निपुणता का परिचय देते हुए कहीं किसी सूफियाना खय़ाल को सिर्फ एक दोहे में समेट देने के हुनर से रू-ब-रू कराया तो कहीं वे ‘अम्मा’ और ‘बाबूजी’ से जुड़े संजीदा रिश्तों की यादों को विस्तार देते नज़र आए। आधुनिकता के इस बेरुखे दौर में उनकी रचनाएँ रिश्तों के मर्म को समझने और समझाने की विनम्र कोशिश लेकर सामने आईं। हमारे समय की आलोचना के प्रतिमान डॉ. नामवर सिंह ने उन्हें ‘दुष्यंत की परंपरा का आलोक’ कहा तो हिन्दी और उर्दू के कई जाने-माने लेखकों, समीक्षकों के साथ साहित्य-सुधियों ने भी उनके इस संग्रह को हाथों-हाथ लिया । बाज़ारवादी युग में दरकते इन्सानी रिश्तों पर लिखी आलोक की गज़लें उनके निजी अनुभवों का आईना हैं। ‘आमीन’ की कई रचनाओं में सामाजिक सरोकार के सबूत मिले जिसने आलोक को सहज ही बेदार और प्रगतिशील कवियों की कतार में ला खड़ा किया—वह कतार जो हिन्दी गज़ल और उर्दू गज़ल की खेमेबंदी से परे सिर्फ और सिर्फ गज़ल की हिफाज़त कर रही है । ‘आमीन’ के प्रथम संस्करण की भूमिका शीर्ष लेखक कमलेश्वर ने लिखी जो किसी पुस्तक पर उनकी अंतिम भूमिका के रूप में याद की जाती है और मशहूर शायर-फिल्कार गुलज़ार के पेशलफ्ज़ ने इस पर एक मुकम्मल संग्रह होने की मुहर लगाई। दो भाषाओं का पुल बनाने वाले एक नौजवान के पहले संग्रह पर हिन्दी और उर्दू के दो शिखर कलमकारों के शब्द इस बात की गवाही बने कि आलोक ने अपना अदबी इम्तेहान पूरी संजीदगी और तैयारी से दिया है जो बहुत हद तक सही साबित हुई; वहीं दूसरे संस्करण की भूमिका डॉ. नामवर सिंह ने लिखी, इस शुभकामना के साथ कि ये रचनाएँ और दूर तक पहुँचें। आमीन!

लेखक : आलोक श्रीवास्तव

विता, कहानी, फिल्म-लेखन और टीवी पत्रकारिता का जाना-माना नाम।

शाजापुर (म.प्र.) में 30 दिसंबर को जन्म। तीन दशक से गज़लकार के रूप में प्रसिद्धि। सभी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन। पहला ही गज़ल-संग्रह ‘आमीन’ सर्वाधिक चर्चित, लोकप्रिय व बहु-पुरस्कृत पुस्तकों में शामिल। ‘राजकमल’ से ही प्रकाशित ‘आफरीन’ नामक कथा-संग्रह के भी अब तक अनेक संस्करण। कई भारतीय व विदेशी भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद। उर्दू के ख्यात शायरों की पुस्तकों का संपादन।

हिंदी के अन्यतम युवा गज़लकार जिनकी अनेक गज़लों व नज़्मों को जगजीत सिंह, पंकज उधास, उस्ताद राशिद खान, शुभा मुद्गल व रेखा भारद्वाज से लेकर महानायक अमिताभ बच्चन तक ने अपना स्वर दिया। भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकारों व पाश्र्व गायकों ने भी कई गीतों व गज़लों को स्वरबद्ध किया।

शब्दशिल्पी सम्मान (भोपाल), हेमंत स्मृति कविता सम्मान (मुंबई), परंपरा ऋतुराज सम्मान (दिल्ली), मध्य प्रदेश साहित्य अकादेमी का दुष्यंत कुमार पुरस्कार, फ़िराक गोरखपुरी सम्मान, (उदयपुर), मास्को (रूस) का अंतरराष्ट्रीय पुश्किन सम्मान  सहित अमेरिका के वॉशिंगटन में हिंदी गज़ल सम्मान  व कथा यूके की ओर से ब्रिटेन की संसद हाउस ऑफ  कॉमन्स  में सम्मानित हुए पहले युवा गज़लकार।

अमेरिका, इंग्लैंड, यूरोप, रूस, साउथ अफ्रीका और यूएई सहित 15 से अधिक देशों की साहित्यिक यात्राएँ।

संप्रति : टीवी पत्रकारिता और फ़िल्मों में सक्रिय लेखन।

 

 

 

मेरे बाद

गहरी से गहरी बात को आसानी से कह देने का जटिल हुनर जाननेवाले राहत भाई से मेरा बड़ा लम्बा परिचय है। मुशायरे या कवि-सम्मेलन में वे कमल के पत्ते पर बूँद की तरह रहते हैं। पत्ता हिलता है, झंझावात आते हैं, बूँद पत्ते से नहीं गिरती। कई बार कवि और शायर कार्यक्रम शुरू होने से पहले मंच पर आसन जमा लेते हैं, लेकिन इस नए कॉरपोरेट ज़माने में चूँकि कवि-सम्मेलन या मुशायरा एक शो या इवैंट की तरह हैं, तो शुरुआत से पहले आमतौर से शायर हज़रात मंच के पीछे खड़े रहते हैं।

 

लेखक :डॉ. राहत इन्दौरी

डॉ. राहत इन्दौरी का जन्म 1 जनवरी, 1950 को इंदौर में श्री रिफतुल्लाह और मकबूल बी के घर में हुआ । उन्होंने उर्दू में एम्.ए. और पी-एच.दी. करने के बाद इंदौर विश्वविद्यालय में सोलह वर्षों तक उर्दू साहित्य अध्यापन और त्रैमासिक पत्रिका ‘शाखें’ का 10 वर्षों तक संपादन किया । पचास से अधिक लोकप्रिय हिंदी फिल्मों एवं म्यूजिक अल्बमों के लिए गीत लेखन कर चुके हैं तथा सभी प्रमुख गजल गायकों ने उनकी गजलों को अपनी आवाज दी है ।अब तक उनके छः कविता-संग्रह प्रकाशित और समादृत हो चुके हैं । पिछले 40-50 वर्षों से लगातार देश-विदेश के मुशायरों और कवी-सम्मेलनों में शिरकत । अब तक अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, सिंगापूर, मोरिशस, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि अनेक देशों की अनेकानेक यात्राएँ कर चुके हैं और देश-दुनिया के दर्जनों पुरस्कारों से सम्मानित हैं ।

सम्पर्क : पोस्ट बॉक्स 555, इन्दौर।

rahatindoripost@gmail.com

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