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Sardar Patel Aur Bhartiya Musalman/Jinna : Ek Punardrishti/Hindu Hindutva aur Hindustan

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SKU: Set-73 (इतिहास की समझ : तीन जरुरी किताबें ) Author: Rafiq Zakaria, Sudhir Chandra, Virendra Kumar Baranwal
Subject: History
Categories: History, Politics

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Description

सरदार पटेल और भारतीय मुस्लमान

लेखक : रफीक ज़करिया

जन्म : 5 अप्रैल, 1920।

डॉ. रफीक ज़करिया विधि, शिक्षा, पत्रकारिता, राजनीति और इस्लाम से जुड़े विषयों के आधिकारिक विद्वान थे। उन्होंने स्नातकोत्तर परीक्षा मुम्बई विश्वविद्यालय से स्वर्णपदक के साथ उत्तीर्ण की और बाद में लन्दन विश्वविद्यालय से विशेष प्रतिष्ठा के साथ पीएच.डी. की उपाधि ग्रहण की। स्वतंत्रता-संघर्ष के साथ छात्र-जीवन से ही जुड़े रहे। अच्छे वकील के रूप में ख्याति प्राप्त करने के बाद महाराष्ट्र विधान परिषद् में चुने गए और 1962 के बाद से पन्द्रह वर्षों तक राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। 1978 में सांसद बने और संसद में कांग्रेस के उपनेता का पद सँभाला। बाद में प्रधानमंत्री के विशेष दूत के रूप में उन्होंने 1984 में इस्लामी देशों का काफी महत्त्वपूर्ण दौरा किया। 1965, 1990 और 1996 में तीन बार उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

अन्तरराष्ट्रीय प्रतिष्ठाप्राप्त विद्वान डॉ. ज़करिया ने ‘ए स्टडी ऑफ नेहरू’ समेत बीस से अधिक पुस्तकें लिखीं। सलमान रश्दी की किताब ‘सेटेनिक सर्वेज़’ के प्रत्योत्तर में लिखी उनकी पुस्तक ‘मोहम्मद एंड कुरान’ को विश्वव्यापी ख्याति मिली है। वे विभिन्न सामाजिक और शैक्षिक संगठनों से जुड़े रहे। मुम्बई और औरंगाबाद में उन्होंने एक दर्जन से ज़्यादा उच्चशिक्षा संस्थानों की स्थापना भी की।

उनकी प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें हैं—‘ए स्टडी ऑफ नेहरू’, ‘रजि़या : द क्वीन ऑफ इंडिया’, ‘राइज ऑफ मुस्लिम्स इन इंडियन पॉलिटिक्स’, ‘हंड्रेड ग्लोरियस इयर्स’, ‘प्राइस ऑफ पावर’, ‘स्ट्रगल विदिन इस्लाम’, ‘ट्रायल ऑफ बेनज़ीर’, ‘मोहम्मद एंड कुरान’, ‘इकबाल : ए पोएट एंड द पॉलिटिशियन’, ‘द वाइडनिंग डिवाइड’, ‘सरदार पटेल एंड इंडियन मुस्लिम्स’, ‘द प्राइस ऑफ पार्टीशन’, ‘गांधी एंड द ब्रेकअप ऑफ इंडिया’ आदि।

निधन : 9 जुलाई, 2005

 

जिन्ना एक पूर्णदृष्टि

लेखक : वीरेन्द्र कुमार बरनवा

जन्म : 21 अगस्त, 1941; फूलपुर, आज़मगढ़ (उ.प्र.)।

माँ गायत्री देवी; पिता दयाराम बरनवाल—स्वतंत्रता सेनानी, भारत छोड़ो आन्दोलन (1942) के दौरान जेल-यात्रा, समाजवादी आन्दोलन से गहरा जुड़ाव।

शिक्षा : बी.ए. (ऑनर्स), एम.ए. (अंग्रेज़ी साहित्य), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय; एल-एल.बी., भोपाल विश्वविद्यालय।

पेशा : कुछ वर्ष अंग्रेज़ी भाषा और साहित्य का अध्यापन, सन् 1969 से 2005 तक भारतीय राजस्व सेवा (इंडियन रेवेन्यू सर्विस) में, मुख्य आयकर आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त।

कृतियाँ : ‘पानी के छींटे सूरज के चेहरे पर’ (नाइज़ीरियाई कविताओं के अनुवाद), वोले शोयिंका की कविताएँ (नोबेल पुरस्कार सम्मानित पहले अश्वेत रचनाकार की कविताओं के अनुवाद), ‘पहल’ पुस्तकमाला के अन्तर्गत ‘रक्त में यात्रा’ (रेड इंडियन कविताओं के अनुवाद) एवं  ‘वो पहला ना$खुदा हिन्दोस्तानी के स$फीने का—वली दक्खिनी’ तथा ‘तनाव’ पुस्तकमाला के अन्तर्गत ‘माची तवारा की कविताएँ’ (युवा जापानी कवयित्री की तन्काओं

के अनुवाद)—सभी पुस्तकें/पुस्तिकाएँ विस्तृत परिचयात्मक भूमिका के साथ।

‘जिन्ना : एक पुनर्दृष्टि’ (जिन्ना तथा उनके महत्त्वपूर्ण समकालीनों पर एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में विमर्श), ‘हिन्द स्वराज : नव सभ्यता-विमर्श’, ‘रतनबाई जिन्ना’ (नाटक— प्रकाश्य) तीनों राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली से।

अभिरुचियाँ : हिन्दी, उर्दू, अंग्रेज़ी, संस्कृत तथा तुलनात्मक साहित्य के साथ हाशिये पर पड़े साहित्य, $खासकर अश्वेत और रेड इंडियन साहित्य एवं भारतीय पुनर्जागरण तथा स्वतंत्रता-संग्राम के विमर्श में गहरी रुचि।

पुरस्कार : केंद्रिय हिंदी संस्थान (आगरा) के महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार से राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित।

सम्प्रति :  महात्मा गांधी से जुड़ी एक पुस्तक पर काम कर

रहे हैं।

सम्पर्क : ‘गायत्री’, बी-72, कौशाम्बी, गाजि़याबाद-201010 (उ.प्र.)।

 

 

हिन्दू हिंदुत्व और हिंदुस्तान

लेखक : सुधीर चन्द्र

वर्षों से सुधीर चन्द्र आधुनिक भारतीय सामाजिक  चेतना के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करते रहे हैं। राजकमल से ही प्रकाशित—हिन्दू, हिन्दुत्व, हिन्दुस्तान (2003), गाँधी के देश में (2010), गाँधी : एक असम्भव सम्भावना (2011), रुक्माबाई : स्त्री, अधिकार और कानून (2012), बुरा वक्त अच्छे लोग (2017), भूपेन खख्खर : एक अन्तरंंग संस्मरण (2020) के बाद हिन्दी में यह उनकी नयी पुस्तक है।
अँग्रेज़ी में उनकी पुस्तकें—डिपेंडेंस एण्ड डिसइलूज़नमेंट : नेशनल कांशसनेस इन लेटर नाइन्टींथ सेंचुरी इण्डिया (2011), कांटिन्युइंग डिलेमाज़ : अण्डरस्टैंडिंग सोशल कांशसनेस (2002), एंस्लेव्ड डॉटर्स : कॉलोनियलिज़्म, लॉ एण्ड विमेन्स राइट्स (1997) और द ऑप्रेसिव प्रज़ैन्ट : लिटरेचर एण्ड सोशल कांशसनेस इन कॉलोनियल इण्डिया (1992)।
सुधीर चन्द्र देश-विदेश के अनेक अकादेमिक संस्थानों से सम्बद्ध रहे हैं

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