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Ullanghan / Os Ki Boond / Nachti Aakritiyan : Sherlock Holmes Ke Jasoosi Kaarname

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Author: Rahi Masoom Raza / Rajesh Joshi / Sir Arthur Conan Doyle, Tr. Sanjeev Nigam
Subject: Fiction : Novel, Poetry
Categories: Crime Fiction/ Mysteries, Fiction : Novel, Fiction : Stories, Poetry

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Description

उल्‍लंघन

उल्‍लंघन संग्रह में कवि हुक्म-उदूली की अपनी प्राकृतिक इच्छा से आरम्भ करते हुए मौजूदा दौर की उन विवशताओं से अपनी असहमति और विरोध जताता है, जिन्हें सत्ता हमारी दिनचर्या का स्वाभाविक हिस्सा बनाने पर आमादा है।

एक ऐसे समय में ‘जिसमें न स्मृतियाँ बची हैं/न स्वप्न और जहाँ लोकतंत्र एक प्रहसन में बदल रहा है/एक विदूषक किसी तानाशाह की मिमिक्री कर रहा है’—ये कविताएँ हमें निर्प्रश्न अनुकरणीयता के मायाजाल से निकलने का रास्ता भी देती हैं, और तर्क भी।

कवि देख पा रहा है कि ‘सिकुड़ते हुए इस जनतंत्र में सिर्फ़ सन्देह बचा है’, ताक़त के शिखरों पर बैठे लोग नागरिकों को शक की निगाह से देखते हैं, तरह-तरह के हुक्मों से अपने को मापते हैं; कहते हैं कि साबित करो, तुम जहाँ हो वहाँ होने के लिए कितने वैध हो, और तब कविता जवाब देती है–‘ओ हुक्मरानो/मैं स्वर्ग को भूलकर ही आया हूँ इस धरती पर/तुम अगर मुझे नागरिक मानने से इनकार करते हो/तो मैं भी इनकार करता हूँ /इनकार करता हूँ तुम्हें सरकार मानने से!’

लगातार गहरे होते राजनीतिक-सामाजिक घटाटोप के विरुद्ध पिछले चार-पाँच सालों में जो स्वर मुखर रहते आए हैं, राजेश जोशी उनमें सबसे आगे की पाँत में रहे हैं। इस संग्रह की ज़्यादातर कविताएँ इसी दौर में लिखी गई हैं। कुछ कविताएँ महामारी के जारी दौर को भी सम्बोधित हैं जिसने सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने के सरकारी उद्यम पर जैसे एक औपचारिक मुहर ही लगा दी–‘सारी सड़कों पर पसरा है सन्नाटा/बन्द हैं सारे घरों के दरवाज़े/एक भयानक पागलपन पल रहा है दरवाज़ों के पीछे/दीवार फोड़कर निकल आएगा जो/किसी भी समय बाहर/और फैल जाएगा सारी सड़कों पर!’

यह किताब क्यों खरीदें?

  • महामारी के जारी दौर को सम्बोधित कविताओं का पठनीय संकलन।
  • साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित, समकालीन हिन्दी कविता के प्रतिनिधि हस्ताक्षर राजेश जोशी का नवीनतम कविता-संग्रह।
  • वर्तमान की प्रतिकूलताओं और विडम्बनाओं के विरुद्ध प्रतिरोध तथा दुनिया को बदलने और बेहतर बनाने की उम्मीद से भरी कविताओं का संग्रह।

सब कुछ के बावजूद जीवन में है प्रतीक्षा और इस संग्रह के कवि के काव्य-स्वप्न में भी।

ओस की बूँद

राही मासूम रज़ा ने ‘आधा गाँव’ लिखकर हिन्दी-उपन्यास में अपना एक सुनिश्चित स्थान बनाया था। ‘टोपी शुक्ला’ उनका दूसरा सफल उपन्यास था और यह उनका तीसरा उपन्यास है।

यह उपन्यास हिन्दू-मुस्लिम समस्या को लेकर शुरू होता है लेकिन आख़िर तक आते-आते पाठकों को पता चलता है कि हिन्दू-मुस्लिम समस्या वास्तव में कुछ नहीं है, यह सिर्फ़ राजनीति का एक मोहरा है, और जो असली चीज़ है वह है इंसान के पहलू में धड़कनेवाला दिल और उस दिल में रहनेवाले जज़्बात; और इन दोनों का मजहब और जात से कोई ताल्लुक नहीं। इसीलिए साम्प्रदायिक दंगों के बीच सच्ची इंसानियत की तलाश करनेवाला यह उपन्यास एक शहर और एक मजहब का होते हुए भी हर शहर और हर मजहब का है ! एक छोटी-सी ज़िंदगी की दर्द भरी दास्तान जो ओस की बूँद की तरह चमकीली और कम-उम्र है।

यह किताब क्यों खरीदें?

  • एक शहर और एक मजहब के माध्यम से हिन्दुस्तान के हर शहर और हर मजहब की कहानी।
  • यह उपन्यास स्पष्ट करता है कि राजनीति के लिए हिन्दू-मुसलमान एक मोहरे के सिवा और कुछ नहीं हैं।
  • साम्प्रदायिक दंगों के पीछे की हक़ीक़त उजागर करता और सच्ची इंसानियत की निशानदेही करता उपन्यास।
  • हिन्दी के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण उपन्यासों में गिने जाने वाले ‘आधा गाँव’ के लेखक की एक और पठनीय कृति।

 

नाचती आकृतियाँ

शरलॉक होम्स ब्रिटिश लेखक सर आर्थर कॉनन डायल का काल्पनिक चरित्र है, लेकिन लोकप्रियता के मामले में वह अपने रचयिता से  कहीं ज़्यादा प्रसिद्ध है। वर्ष 1887 में अपनी पहली जासूसी कहानी ‘ग्लोरिया स्कॉट’ में डायल ने उसे पहली बार काग़ज़ पर उतारा और फिर वह उनके चार उपन्यासों तथा छप्पन कहानियों में अपराधों की गुत्थियाँ सुलझाता रहा।

अनेक फ़िल्मों और धारावाहिकों का विषय‌ बन चुके शरलॉक होम्स की विशेषता है–जासूसी को लेकर उसका सहजबोध और आपराधिक रहस्यों को खोलने के प्रति उसकी मानवीय सदिच्छा। उसकी तार्किक बुद्धि देर-सबेर अपराधी के दिमाग़ की कार्यशैली को समझ जाती है, और फिर उसे किसी भी मामले को सुलझाने में समय नहीं लगता। उसकी चतुराई, हाज़िरजवाब और मानव-व्यवहार को समझने की क्षमता उसे एक आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करती है।

यह किताब क्यों खरीदें?

  • जासूस शरलॉक होम्स की रोमांचक कहानियाँ जो न केवल अपने रचनाकार से, बल्कि किसी भी सचमुच की हस्ती से ज्यादा लोकप्रिय और मशहूर है।
  • संग्रह की सात में से चार कहानियों में भारत के सन्दर्भ हैं जो इसे हिन्दी और भारतीय पाठकों के लिए विशेष तौर पर दिलचस्प बनाता है।

पठनीय अनुवाद में सुन्दर प्रस्तुति।

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